उदयपुर/सराडा क्षेत्र के परसाद गाव के समीप स्थित तरणेश्वर महादेव का प्राचीन मन्दिर है जो की 5000 साल पुराना मंदिर है।हर पूर्णिमा पर यहां पर श्रदालुओं का ताता लगता है वहीं हजारों श्रदालु मन्नत मांगने पर पूरी होने पर यहां पर सोमवार या पूर्णिमा पर प्रसाद का भोग लगाते है और परिवार सगो सम्बन्धितो को खिलाते है।
यहां पर वानर भी मंदिर परिसर में घूमते रहे है जो किसी भी श्रदालु को नुकसान नहीं पहुंचाते है और श्रदालुओ के द्वारा दिए गए प्रसाद व मक्की,गेहूं के दानों को खाते है।
इस मंदिर में आने से पूर्व श्रदालुओं की मान्यता है कि यहां पर बने कुंडो में हाथ पैर धोने या स्नान कर आने से पाप धूल जाते फिर श्रदालु दर्शन करते है।
यहां पर बने शिव लिंग की कुछ रहस्य मय बाते जिससे श्रदालुओं ने बताया कि यहां पर बने शिव लिंग के ऊपर फूल चढ़ा कर भगवान से प्रार्थना करते है कि सभी लोगो में चोर कोन है तो वह फूल जो व्यक्ति चोर होता है उसके शिव लिंग पर फूल चढ़ाते ही फूल नीचे गिर जाता है।
यहां पर आस पास हनुमान मंदिर सहित कई माता जी मंदिर बने हुए हैं।यहां पर साधु संत भी निवास करते है।
यहां पर पत्थर से बना हुआ गाय का मुख व बोरिंग जब से मंदिर की स्थापना हुई है तब से जल की धारा निरन्तर आती ही रहती है अभी भी बंद नहीं होती है।
यहां पर हर पूर्णिमा व सोमवार को सराडा,चावंड,केजड,परसाद,खरबर,डेलवास,नाल हल्कार, कातनवाडा गावों व गुजरात,महाराष्ट्र सहित कई स्थानों से श्रधालु यहां दर्शन के लिए आते है।
सराडा से नितेश पटेल की रिपोर्ट
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