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उदयपुर - कैसे सरकारी कर्मचारी किसानों को भटकाते है - विकास कुमार मीणा


  *चमन लाल महाविद्यालय रुड़की लंढौरा की तरफ से आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी*

*जिला हरिद्वार उत्तराखंड*

उदयपुर/किसानों की आत्महत्याओं से सुलगता भारत : समस्याएं एवं चुनौतियों पर राजनेतिक व अर्थशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया जिसमें सरकारी नीतियों में किसान समाज विषय पर चर्चा की जिसमे राजस्थान उदयपुर के शोधार्थी  विकास कुमार मीणा ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया और सरकार की कृषि कानून के प्रति जो नीतियां बनाई है उस पर संक्षिप्त रूप से अपना वक्तव्य दिया और साथ ही कैसे सरकारी कर्मचारी किसानों को अनदेखा करते है एक व्यगय के आधार पर बताया की अगर किसान कि फसल खराब हो जाए तो वह किसान ,कागज लेकर पटवारी,तहसील ओर कलेक्ट्रेट में भटकता है मुआवजा लेने के लिए ।



इस पर बताया की अगर किसान अपनी समस्या को लेकर पटवारी के पास जाता है तो पटवारी उस गरीब किसान को अनदेखा करता है ओर अभी समय नहीं है कल आना बोलकर उसे वापस भेज देता है ओर किसान थका हारा वापस जाता है ऐसे ही वह एक दो दिन जाने के बाद किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर तहसील तक जाता ओर वहा पर भी तहसीलदार साहब भी नहीं मिलते हैं या तो छुट्टियों में चले जाते हैं या किसी मीटिंग में बैठे होते हैं वहां से किसान तहसील कार्यालय के भी एक-दो दिन चक्कर काटता है वह किसी और के कहने पर वह कलेक्ट्रेट तक के चक्कर काटता है लेकिन वहां पर भी किसान थका हारा ही नजर आता है और वहां जाने पर भी कोई उसे उचित राह नहीं मिलती हैं अगर मिलती भी है तो बीच में बिचोलिए ही उसे ठगी कर जाते है ऐसे में किसान को फसल का सही दाम नहीं मिलता है ओर वह कर्ज में डूब जाता है और वह इस स्थिति में ना तो अपने बच्चो को पढ़ाने के लिए फीस की व्यवस्था कर पता है ना ही अपने ऊपर का कर्ज । किसान थका हारा किसान आत्महत्या करने को मजबुर हो जाता है।

विकास कुमार मीणा अर्थशास्त्र विभाग जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय उदयपुर और प्रेम शंकर मीणा हिंदी विभाग  मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर से राजस्थान के दो सदस्यो ने शिरकत की।


*कालूलाल मीणा की रिपोर्ट*

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